कबीरा देखो जग बौराना, सांच कहूँ तो मारन धावे... झूठे जग पतियाना |
लेकिन मैं तो सच कहूँगा, पागल जो हूँ | पागल कुछ भी कह सकता है | इस पागलपंथी में गालियाँ भी निकलेंगी... हास्य भी निकलेगा... रुदन भी होगा | मेरे पागलपन में शायद अघोरपन भी दिखेगा, बोधिसत्व का भाव मिलेगा | निर्विकार ह्रदय का पागल, जिसकी तृष्णा ही पागल पंथ है |
वैसे कोई पागल अपने आपको पागल नहीं कहता... उसकी नज़रों में यह संसार पागलखाना है | अब कैसी कैसी पागलपंथी चल रही है यह यहाँ पढने को मिलेगा |
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