कुम्भ स्नान और पागलपंथी
फोटो साभार- mahakumbhfestival.com
मैंने इसबार कुम्भ स्नान के लिए प्रयाग का चक्कर नहीं लगाया | लेकिन टीवी, समाचार पत्रों और इन्टरनेट के माध्यम से वहां के हरेक पहलु की जानकारी लेता रहा| धन्यवाद कुछ मित्रों का जिन्होंने वहां की गतिविधियों से लगातार अवगत कराया |
लाखों करोड़ों की धक्कम-पेल, नागा-साधा-साधू ना जाने कितने नाम और इनके कितने आयाम | रंग बिरंगी पताकाओं से सुसज्जित टोलियाँ , तोरणद्वार, मठ | और उनमे चीलम के धुएं उड़ाते, धुनी की राख लगाए साधू सन्यासी | कोई एक पैर पर खड़ा है तो कोई काँटों पर लेटा है | कोई दो मीटर की जटा दिखा रहा है तो कोई दिगंबर बना घूम रहा है |
पत्रकार, कैमरामैन और माइक पकडे संवाददाता इन सबकी खोज कहबर पल दर पल देते रहे | आस्था की दुहाई मिलती रही | लोग पुण्यभागी बनते रहे | गंगा की एक डुबकी और उनके जन्म जन्मान्तर के पाप धुल गए | अगली और पिछली सात पीढियां शुद्ध हो गयीं | अब ये चोला रहे या छूटे बैकुंठ तो लिखा लिया चित्रगुप्त जी की बही में | कडकडाती ठंढ भी इस पुण्यलाभ का लालच ना डिगा सकी |
लोग आते जा रहे थे | बसों में भरकर, ट्रकों, ट्रैक्टर और जीप में लदकर | ट्रेन में ठुंसे हुए चले आ रहे थे | तिल रखने को जगह नहीं | इतना पुण्य बह रहा था और लोग अपने हिस्से को लेने के लिए देश विदेश से जमा हो रहे थे | और ऐसे में हुयी रेलवे स्टेशन पर भगदड़ की दुर्घटना कितनो को काल कलवित कर गयी | क्या उन्हें मोक्ष मिला ? या उनके मरने के बाद उनके शव के साथ घृणित राजनीति भी की गयी ?
मेरी बातें जिन्हें बुरी लगनी है लगें | मगर ये कुम्भ स्नान, ये साधुओं का अंग प्रदर्शन, शाही स्नान दिखावा मात्र ही हैं | मेरी माने तो यह पोंगापंथ ही है, विशुद्ध पोंगापंथ |
यह अंधी आस्था और अंधविश्वास ने लोगों को कहाँ तक पहुंचा दिया | भोली भाली जनता गर्त में और ये पोंगापंथ के रक्षक मठाधीश बन गए | मेरा प्रश्न क्या गंगा सिर्फ प्रयाग में ही थीं ? अमृतघट से छलका अमृत प्रयाग में गिरा, तो अमृत प्रवाहिनी गंगा का प्रवाह प्रयाग में रुक जाना चाहिए था | एक बैरियर लगा देना चाहिए था की अमृत सिर्फ और सिर्फ प्रयाग में रहे , गंगा उसे अपने साथ समुद्र में विसर्जित ना करे | प्रयाग के अलावे अन्य गंगा तटों पर गंगा जल तो हो मगर अमृत ना हो |
हिन्दू धर्म एक जीवन प्रवाह है | इसके हरेक व्रत त्यौहार और क्रिया कलापों में गूढ़ रहस्य है | लेकिन पूराकाल से धन और सत्तालोभी पंडितों और विद्वानों ने इस गूढ़ विज्ञानं का रहस्य या तो छुपा लिया या धर्मभीरुता का बाना चढ़ा दिया |
कुम्भ स्नान के वैज्ञानिक पहलु-
कुभ कहते हैं घड़ा को (मिटटी का बर्तन) जिसमे जल या अन्य वस्तुएं रखी जाएं | अगर हिन्दू धर्म के योगशास्त्र के पहलु से देखा जाए तो कुम्भ मनष्य के शरीर का प्रतिक मात्र है | जिसमे हम प्राण वायु का धारण करते हैं | यही प्राण वायु हमें जीवन देती है | यह प्राणवायु हमारी इन्द्रियों, हमारी नाड़ियो को बल देती है | साधक इस प्राणवायु को साधते हैं | इसके अमृत्तत्व का पान करते हैं | इडा-पिंगला का समन्वय करते हैं | योग का एक बंध (बंधन या बाँध) क्रिया का नाम कुम्भक है , कुम्भक करते वक्त श्वास को अन्दर खींचकर या बाहर छोड़कर रोककर रखा जाता है | कुम्भक के अभ्यास
से आयु की वृद्धि होती है। संकल्प और संयम का विकास होता है। भूख और प्यास कर कंट्रोल किया जा सकता है। इससे खून साफ होता है,
फेफड़े शुद्ध-मजबूत होते हैं। शरीर कांतिमान बनता है।
नेत्र ज्योति बढ़ती है। नकारात्मक चिंतन सकारात्मक बनता है तथा भय और चिंता दूर होते
हैं।
दूसरा धारण बिंदु (शक्ति) का है अर्थात ब्रह्मचर्य रक्षा |
"मरणं बिंदुपातेन जीवनं बिंदुधारणात " |
ब्रह्मचर्य से जीवन शक्ति को उर्जा मिलती है , आयुवर्धन होता है |
अब इस कुम्भ को स्नान से जोड़ने की प्रक्रिया का गूढ़ रहस्य - शारीरिक शुद्धता के लिए स्नान अति आवश्यक है | श्वास के कुम्भक से आतंरिक मन शुद्धि , ब्रह्मचर्य से ओज वृद्धि और स्नान से तन सुद्धि | शीतल जल का सां शरीर के लिए उत्तम माना गया है | रोम छिद्र खुल जाते हैं, त्वचा जागृत हो जाती है, स्वेद् और स्रावित विकार दूर होते हैं | मन स्फूर्त बनता है |
स्वस्थ तन और मन अगर मिल जाए तो फिर किसी और अमृत की क्या आवश्यकता ! और इसके लिए किसी गंगा तट की आवश्यकता नहीं... संत रैदास की माने -"मन चंगा तो कठौती में गंगा" |
पोंगापंथी मोक्ष का कारण नहीं बनता, मोक्ष प्राप्ति के लिए गंगा स्नान कारण नहीं बन सकता | और अगर गंगा स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है और पुन्य का लाभ मिलता है तो गंगा में रहनेवाले जीव जंतु एक दुसरे का भोजन नहीं बनते | कोई मगरमच्छ -घड़ियाल मच्छलियों को मारने का पाप नहीं करता |
उस पोंगापंथ से बचकर इस पागलपंथ के बातों को समझें ... शायद आपको मेरी पागलपंथी की बातें उचित लगने लगे ...
तो अगले कुम्भ कहाँ स्नान कर रहे हैं ? मुझे जरुर अवगत कराएं...